कुंभ मेला 13 पावन अखाड़े
सन्यासी, बैरागी, उदासीन एवं निर्मल संप्रदाय के सभी 13 अखाड़ों का गौरवशाली इतिहास, आचार्य महामंडलेश्वर, शिविर स्थल एवं शाही पेशवाई जुलूस कार्यक्रम।
श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा
इष्टदेव: भगवान दत्तात्रेय (अवधूत)
सनातन धर्म की रक्षा हेतु आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित सबसे बड़ा एवं प्राचीन सन्यासी अखाड़ा। लाखों नागा संन्यासियों का सर्वोच्च केंद्र।
श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी
इष्टदेव: भगवान कार्तिकेय (स्कंद)
विद्वान संतों एवं महामंडलेश्वरों का प्रतिष्ठित अखाड़ा। मनसा देवी एवं बिल्केश्वर महादेव का संचालन।
श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी
इष्टदेव: भगवान कपिल मुनि
748 ई. में स्थापित, उज्जैन महाकालेश्वर एवं हरिद्वार के पवित्र तीर्थों के प्रमुख संरक्षक।
श्री पंच अटल अखाड़ा
इष्टदेव: भगवान गणेश जी
647 ई. में स्थापित, सनातन संस्कृति एवं धर्मस्थलों की रक्षा का अग्रिम संन्यासी अखाड़ा।
श्री पंच आवाहन अखाड़ा
इष्टदेव: भगवान दत्तात्रेय एवं गजानन
547 ई. में काशी में स्थापित। जूना अखाड़े के साथ संयुक्त धर्म रक्षा परंपरा।
श्री पंच आनंद अखाड़ा
इष्टदेव: भगवान सूर्यनारायण
855 ई. में स्थापित। सूर्योपासना एवं कठोर यौगिक साधनाओं का केंद्र।
श्री पंच अग्नि अखाड़ा
इष्टदेव: मां गायत्री एवं अग्नि देव
अखंड गायत्री जप एवं वैदिक अग्निहोत्र करने वाले ब्रह्मचारी संतों का पावन अखाड़ा।
श्री पंच रामानंदी निर्मोही अणी अखाड़ा
इष्टदेव: प्रभु श्रीराम एवं भक्त हनुमान जी
वैष्णव संप्रदाय का सर्वोच्च अणी अखाड़ा। रामानंदी परंपरा एवं भव्य अखाड़ा छावनी।
श्री पंच रामानंदी दिगंबर अणी अखाड़ा
इष्टदेव: भगवान श्रीराम एवं श्री बालाजी
अखंड राम नाम संकीर्तन और लाखों श्रद्धालुओं के लिए विशाल 24x7 लंगर सेवा हेतु विख्यात।
श्री पंच रामानंदी निर्वाणी अणी अखाड़ा
इष्टदेव: संकटमोचन हनुमान जी
हनुमान गढ़ी अयोध्या के प्रमुख संरक्षक, भक्ति एवं शौर्य परंपरा का संगम।
श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन
इष्टदेव: भगवान श्री चंद्र जी महाराज
गुरु नानक देव जी के ज्येष्ठ सुपुत्र भगवान श्री चंद्र जी द्वारा स्थापित। सनातन एवं सिख परंपरा के सेतु।
श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन
इष्टदेव: भगवान श्री चंद्र जी एवं श्री हरि विष्णु
1710 ई. में स्थापित, चांदी के दिव्य रथों और ज्ञानोपदेशों के लिए प्रसिद्ध उदासीन अखाड़ा।
श्री पंचायती निर्मल अखाड़ा
इष्टदेव: श्री गुरु ग्रंथ साहिब एवं निराकार प्रभु
1784 ई. में स्थापित, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की शिक्षाओं पर आधारित निर्मल संत परंपरा।